Day 43. ये जीवन है


जीवन तो रंगो का मेला है ऊपर वाले का ये खेला है है धूपों को गरमी तो ठंडी छाया भी है है दुःख अनेक तो सुख पाया भी है फूलो की माला गले में पैरों में काटे है कभी ढोल नगाड़े कभी सन्नाटे हैं उजियारी भोर के कितने सुंदर नज़ारे हैं काली अँधियारी रातों के…